संयमित पहनावा और आभूषण: कामंदकीय नीति सार से सीख
क्या आपने कभी सोचा है कि दरबार की गरिमा केवल राजा के आचरण या नीति से नहीं, बल्कि वहाँ उपस्थित महिलाओं के पहनावे और शालीनता से भी झलकती थी? कामंदकीय नीति सार बताता है कि संयमित आभूषण, मर्यादित वाणी और सुसंस्कृत आचरण ही दरबार के सम्मान और शिष्टाचार की पहचान थे।
![]() |
| दरबार में उपस्थित महिलाओं का पहनावा और आभूषण शुद्ध और मर्यादित चित्र |
परिचय
बाहरी रूप और आचार-व्यवहार का सामंजस्य हर युग में गरिमा और संस्कृति का द्योतक रहा है। कामंदकीय नीति सार बताता है कि मर्यादित आभूषण और सुसंस्कृत आचरण केवल स्त्री की पहचान नहीं, बल्कि समूचे दरबार और समाज की प्रतिष्ठा के प्रतीक हैं। आज के पेशेवर जीवन में भी यही नीति हमें शालीनता और सम्मान की दिशा दिखाती है।
श्लोक और शब्दार्थ
श्लोक:रूपाजीवाः स्त्रियः नातः परिवर्त्तितवाससः ।
राजानमुपतिष्ठेयुर्विशुद्धस्रग्विभूषणः ॥
(कामन्दकीय नीतिसार 7/45)
शब्दार्थ:
- रूपाजीवाः स्त्रियः – सुंदर या आकर्षक जीवन-शैली वाली महिलाएँ
- नातः परिवर्त्तितवाससः – अत्यधिक बदलते या अनियमित वस्त्र नहीं पहनें
- राजान् उपतिष्ठेयुः – राजा के समीप उपस्थित हों
- विशुद्धस्रग् विभूषणः – शुद्ध और सुव्यवस्थित आभूषण
भावार्थ
महिलाएँ अत्यधिक चटकीले या बार-बार बदलने वाले वस्त्र न पहनें। उनके आभूषण स्वच्छ, शुद्ध और सुसंयमित हों, न अतिशयोक्ति से युक्त, न उपेक्षित। उन्हें राजा या वरिष्ठ व्यक्तियों के समक्ष सदैव सम्मान, शालीनता और मर्यादित भाव से उपस्थित होना चाहिए। उनके वेश, वाणी और आचरण में संयम ही उनकी वास्तविक शोभा है।
- कामंदकीय नीति सार के अनुसार, किसी दरबार या संगठन की गरिमा केवल उसके वैभव या सत्ता से नहीं, बल्कि वहाँ उपस्थित व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं की शालीनता, संयम और सुसंस्कृत आचरण से भी प्रकट होती है।
- महिलाओं का स्वच्छ और मर्यादित पहनावा, सुसंयमित आभूषण तथा सौम्य व्यवहार न केवल व्यक्तिगत सम्मान का प्रतीक है, बल्कि राजा और दरबार की प्रतिष्ठा को भी उच्च बनाए रखता है।
नीति
- संयमित और मर्यादित पहनावा अनिवार्य है। - व्यक्ति का वस्त्र और आभूषण उसके संस्कार और विवेक को प्रकट करते हैं। अतः दरबार या किसी औपचारिक स्थान पर सज्जा सदैव शालीनता और सादगी से युक्त होनी चाहिए।
- बाहरी रूप और आचार में संतुलन आवश्यक है। - केवल बाहरी सौंदर्य या वस्त्र ही नहीं, बल्कि वाणी, चाल-ढाल और व्यवहार में भी संयम आवश्यक है। यह संतुलन ही व्यक्ति के भीतर और बाहर के सौंदर्य को एक रूप में लाता है।
- मर्यादित और सम्मानपूर्ण व्यवहार दरबार की गरिमा को बनाए रखता है। - दरबार या कार्यस्थल की प्रतिष्ठा वहाँ - उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति की शालीनता पर निर्भर करती है। सम्मानपूर्ण व्यवहार न केवल व्यक्ति को गरिमा प्रदान करता है, बल्कि पूरे वातावरण को संस्कारित बनाता है।
आधुनिक जीवन में प्रासंगिकता
आज के युग में भी यह नीति उतनी ही प्रासंगिक है जितनी प्राचीन दरबारों में थी। किसी कार्यालय, संस्था या औपचारिक कार्यक्रम में व्यक्ति का संयमित और पेशेवर पहनावा उसकी गंभीरता, जिम्मेदारी और संस्कार का प्रतीक होता है।
- संयमित वेशभूषा से पेशेवर और सम्मानजनक छवि बनती है। - अत्यधिक चमक-दमक से रहित, सुसंयमित और स्वच्छ परिधान व्यक्ति को विश्वसनीय और परिपक्व बनाते हैं।
- बाहरी आकर्षण और मर्यादा का संतुलन बना रहता है। - आधुनिकता और परंपरा के बीच यह संतुलन व्यक्ति को सौंदर्य और गरिमा, दोनों का धारक बनाता है।
- औपचारिक वातावरण में शालीन और व्यवस्थित उपस्थिति सुनिश्चित होती है। - कार्यस्थल या सार्वजनिक मंच पर शालीन आचरण और मर्यादित प्रस्तुति से न केवल व्यक्ति की, बल्कि संपूर्ण संगठन की प्रतिष्ठा बढ़ती है।
इस प्रकार कामंदकीय नीति सार की यह शिक्षा समय और परिस्थितियों से परे है, जो भी व्यक्ति इसे अपनाता है, वह अपने आचरण और व्यक्तित्व से स्वयं गरिमा का प्रतीक बन जाता है।
सीख
- बाहरी रूप और आचरण में संयम आवश्यक है। - व्यक्ति का सौंदर्य केवल उसके परिधान से नहीं, बल्कि उसके आचरण और वाणी के संयम से प्रकट होता है।
- आभूषण और वस्त्र शुद्ध, स्वच्छ और सुव्यवस्थित होने चाहिए। - सज्जा में सादगी और पवित्रता ही सच्चे संस्कारों का परिचायक है। यह शालीनता व्यक्ति को आत्मविश्वास और सम्मान दोनों प्रदान करती है।
- मर्यादित व्यवहार से सम्मान और शिष्टाचार सुनिश्चित होता है। - संयमित वाणी, शालीन आचरण और मर्यादित व्यवहार से ही व्यक्ति समाज और संस्था, दोनों की गरिमा बढ़ाता है।
निष्कर्ष
कामंदकीय नीति सार का यह श्लोक बताता है कि राजा और दरबार की गरिमा बनाए रखने के लिए महिलाओं का पहनावा, आभूषण और व्यवहार संयमित, शुद्ध और मर्यादित होना चाहिए। केवल सुंदरता ही पर्याप्त नहीं है, शिष्टाचार और संतुलन भी महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्नोत्तर
प्रश्न: क्या यह केवल महिलाओं पर लागू होता है?उत्तर: मूल रूप से यह महिलाओं के संदर्भ में है, लेकिन आधुनिक दृष्टि से पेशेवर और औपचारिक परिस्थितियों में सभी पर लागू होता है।
प्रश्न: क्या बाहरी रूप से आकर्षक होना गलत है?
उत्तर: नहीं, लेकिन इसे संयम और मर्यादित व्यवहार के साथ संतुलित होना चाहिए।
संयम, शुद्ध आभूषण और मर्यादित आचार-व्यवहार किसी भी औपचारिक या पेशेवर वातावरण में सम्मान, शिष्टाचार और गरिमा को बनाए रखते हैं। अगर आप भी कामंदकीय नीति सार और अन्य भारतीय नीति शास्त्रों की गहन शिक्षाओं को सरल और आधुनिक रूप में समझना चाहते हैं, तो अभी सब्सक्राइब करें। प्राचीन नीति के अमूल्य संदेशों को अपने जीवन और संगठन में लागू करें, क्योंकि संयम ही सच्चा वैभव है, और मर्यादा ही वास्तविक शोभा।
पाठकों के लिए सुझाव
- औपचारिक और पेशेवर अवसरों में संयमित और मर्यादित पहनावा अपनाएँ।
- आभूषण और बाहरी रूप शुद्ध और सुव्यवस्थित रखें।
- व्यवहार में हमेशा सम्मान और शिष्टाचार बनाए रखें।
