कामन्दकीय नीतिसार – अष्टम सर्ग (मण्डलशोधनप्रकरणम्)
कामन्दकीय नीतिसार का अष्टम सर्ग (मण्डलशोधनप्रकरणम्) राज्यों के पारस्परिक सम्बन्धों, शत्रु-मित्र-व्यूहरचना, एवं विजिगीषु (विजयेच्छु राजा) ...
कामन्दकीय नीतिसार का अष्टम सर्ग (मण्डलशोधनप्रकरणम्) राज्यों के पारस्परिक सम्बन्धों, शत्रु-मित्र-व्यूहरचना, एवं विजिगीषु (विजयेच्छु राजा) ...
कामन्दकीय नीतिसार का अष्टम सर्ग (मण्डलशोधनप्रकरणम्) राज्यों के पारस्परिक सम्बन्धों, शत्रु-मित्र-व्यूहरचना, एवं विजिगीषु (विजयेच्छु राजा) ...
किसी भी परिवार, संस्था या राष्ट्र का संकट केवल तब शुरू नहीं होता, जब संघर्ष दिखाई देने लगता है। अक्सर संकट उससे बहुत पहले जन्म ले चुका होता...
“सङ्घातवान् यथा वेणुर्निबिडः कण्टकैर्वृतः । न शक्यते समुच्छेत्तुं भ्रातृसङ्घातवांस्तथा ॥” बाँसों का एक सघन झुरमुट जो चारों ओर से काँटों...
महाभारत के उद्योगपर्व के अंतर्गत ‘प्रजागरपर्व’ में विदुर, राजा धृतराष्ट्र को नीति, धर्म और राजकाज की बातें समझाते हैं। इसी क्रम में वे पहल...
कामन्दकीय नीतिसार का सप्तम सर्ग (राजपुत्ररक्षणप्रकरणम् एवं आत्मरक्षणप्रकरणम्) राजा के उत्तराधिकारियों के अनुशासन एवं संस्कार, तथा राजा की...