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व्यसन नीति: शत्रु की कमजोरी समझें

राजनीति में किसी प्रतिद्वंद्वी को केवल उसकी सेना, धन या बाहरी शक्ति से नहीं समझा जा सकता। प्राचीन भारतीय राजनीति में व्यसन नीति इसी सूक्ष...

Anand Singh Dhami 29 अक्टू॰, 2026

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व्यसन नीति: शत्रु की कमजोरी समझें

राजनीति में किसी प्रतिद्वंद्वी को केवल उसकी सेना, धन या बाहरी शक्ति से नहीं समझा जा सकता। प्राचीन भारतीय राजनीति में व्यसन नीति इसी सूक्ष...

Anand Singh Dhami 29 अक्टू॰, 2026

उपेक्षायान नीति: यान का पाँचवाँ भेद और विवेक

राजनीति में हर उपलब्ध अवसर पर तुरंत आगे बढ़ जाना हमेशा विवेकपूर्ण नहीं होता। कई बार सामने मौजूद लक्ष्य पर पूरी शक्ति लगाने के बजाय किसी दूस...

Anand Singh Dhami 28 अक्टू॰, 2026

प्रसङ्गयान: अभियान का रुख क्यों बदले

राजनीति में कभी-कभी ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति किसी एक के लिए निकलता है और पहुँच जाता है किसी और के पास। अभियान की दिशा रास्ते में ही बदल ज...

Anand Singh Dhami 27 अक्टू॰, 2026

सम्भूयगमन: कामन्दक की यान-नीति

प्राचीन भारत में राज्य केवल तलवार के बल पर नहीं चलते थे। कौटिल्य अर्थशास्त्र की परंपरा में राजा को यह तय करना होता था कि कब अकेले लड़ना है...

Anand Singh Dhami 26 अक्टू॰, 2026

शत्रु से संधि कर जीत का रहस्य

राजा अपनी विशाल सेना के साथ युद्ध के मैदान में आगे बढ़ रहा है। सामने शत्रु खड़ा है, और पीछे पार्ष्णिग्राह, यानी पीछे से आक्रमण करने वाला शत...

Anand Singh Dhami 25 अक्टू॰, 2026

विगृह्य गमन: शत्रु से संघर्ष की नीति

युद्ध का निर्णय केवल इस आधार पर नहीं होता कि किसके पास अधिक सेना है। उससे पहले यह देखना पड़ता है कि सामने कौन है, उसके साथ कौन खड़ा है, अपन...

Anand Singh Dhami 24 अक्टू॰, 2026

कामन्दकीय नीतिसार: यान के पाँच प्रकार

प्राचीन भारतीय राजनीतिशास्त्र और कूटनीति में राजा के कर्तव्यों तथा युद्धकला का सूक्ष्म अध्ययन मिलता है। जब कोई राज्य सीमा विस्तार या शत्रु ...

Anand Singh Dhami 23 अक्टू॰, 2026