Homepage Indian Philosophy and Ethics

Featured Post

धैर्य और सहनशीलता

भारतीय संस्कृति हज़ारों सालों से कैसे जीवित है? जहाँ अनेक प्राचीन सभ्यताएँ समय के साथ बदल गईं या अपना मूल स्वरूप खो बैठीं, वहीं भारतीय सांस...

Anand Singh Dhami 4 जून, 2026

Latest Posts

धैर्य और सहनशीलता

भारतीय संस्कृति हज़ारों सालों से कैसे जीवित है? जहाँ अनेक प्राचीन सभ्यताएँ समय के साथ बदल गईं या अपना मूल स्वरूप खो बैठीं, वहीं भारतीय सांस...

Anand Singh Dhami 4 जून, 2026

विश्वासघाती मित्र: कामन्दक नीति

“भोग पाकर विकृत मित्र - उसे पहले समझाएँ, फिर अनुशासित करें, अन्त में अलग करें”, यह सूत्र कामन्दकीय नीतिसार से लिया गया है। यह प्राचीन भार...

Anand Singh Dhami 3 जून, 2026

तीर्थ यात्रा: चारधाम, कुंभ व आध्यात्मिक लाभ

क्या आपने कभी सोचा कि करोड़ों लोग घर-बार छोड़ तीर्थों को क्यों चल पड़ते हैं? मानसिक तनाव, भागदौड़ और खालीपन आम हो गया है। कई श्रद्धालु और य...

Anand Singh Dhami 2 जून, 2026

कामन्दकीय नीतिसार: क्या कोई निष्पक्ष है?

अक्सर हम अंतरराष्ट्रीय संबंधों या व्यापार में ‘न्यूट्रल’ या ‘मध्यस्थ’ (Neutral/Mediator) लोगों की तलाश करते हैं। हम सोचते हैं कि कोई तीसरा...

Anand Singh Dhami 1 जून, 2026

आत्मा और अहंकार: गहन भेद

कभी आपने सोचा है - हम ‘मैं’ शब्द का इस्तेमाल तो रोज करते हैं, लेकिन यह ‘मैं’ आखिर है कौन? हम अपना नाम, पद, संपत्ति, सोशल मीडिया प्रोफाइल ...

Anand Singh Dhami 31 मई, 2026

कामन्दक नीति: शत्रु-मित्र का रहस्य

दोस्ती और दुश्मनी - ये दो शब्द हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। बचपन से हमें सिखाया जाता है कि मित्रों से प्रेम करो और शत्रुओं से दूर रहो ...

Anand Singh Dhami 30 मई, 2026