धन हानि और कूटनीति: सर्वनाश से बचें
एक छोटी सी वित्तीय हानि पर क्रोधित होना आपसे कितनी बड़ी कीमत चुकवा सकता है? हम अक्सर धन के एक छोटे हिस्से के नुकसान पर इतने उग्र हो जाते...
एक छोटी सी वित्तीय हानि पर क्रोधित होना आपसे कितनी बड़ी कीमत चुकवा सकता है? हम अक्सर धन के एक छोटे हिस्से के नुकसान पर इतने उग्र हो जाते...
एक छोटी सी वित्तीय हानि पर क्रोधित होना आपसे कितनी बड़ी कीमत चुकवा सकता है? हम अक्सर धन के एक छोटे हिस्से के नुकसान पर इतने उग्र हो जाते...
प्राचीन भारतीय कूटनीति में युद्ध अंतिम उपाय माना गया है। जब दो समान रूप से महत्त्वाकांक्षी शक्तियाँ एक ही लक्ष्य पर अड़ जाएँ, तो टकराव स्वा...
प्राचीन भारतीय राजनीति और युद्धशास्त्र के इतिहास में आचार्य कामन्दक का नाम अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है। उनके द्वारा रचित ग्रन्थ ‘कामन्दक...
दो राज्यों की सीमाओं पर तनातनी है। एक राजा का दूत अपमानित होकर लौटा है, और राजसभा में प्रतिशोध की हुंकार गूँज रही है। दूसरी ओर वह राजा है ज...
राजनीति में राजधर्म और मित्रता का रिश्ता सदा से उलझा हुआ रहा है। क्या राजा अपने मित्र के लिए सब कुछ न्योछावर कर दे? और मित्र की उपेक्षा कब...
कामन्दकीय नीतिसार का दशम सर्ग विग्रह और उसके प्रशमन के अनेक आयामों पर विचार करता है। आचार्य कामन्दक यह स्पष्ट करते हैं कि संघर्ष का प्रश्न ...
युद्ध और शांति का प्रश्न राजनीतिक चिंतन में आरंभ से ही महत्वपूर्ण रहा है। किसी संघर्ष को कब शांत करने का प्रयास किया जाए और कब उसका प्रत्य...
कामन्दकीय नीतिसार, दशम सर्ग, श्लोक 6: विग्रह-प्रशमन की राजनीति कामन्दकीय नीतिसार के दशम सर्ग में विग्रह के कारणों और उनके प्रशमन पर विचा...
विग्रहयोनयः: कामन्दकीय नीतिसार में विग्रह के कारण राज्यों के बीच संघर्ष अचानक जन्म नहीं लेता। उसके पीछे कभी अधिकार का विवाद होता है, कभी ...