नीतिसार युद्धपूर्व रणनीति: अचूक जीत
राजनीति में केवल शक्ति का होना पर्याप्त नहीं है। शक्ति का उपयोग कब करना है, किस परिस्थिति में करना है और उसके पीछे उद्देश्य क्या है यह समझ...
राजनीति में केवल शक्ति का होना पर्याप्त नहीं है। शक्ति का उपयोग कब करना है, किस परिस्थिति में करना है और उसके पीछे उद्देश्य क्या है यह समझ...
राजनीति में केवल शक्ति का होना पर्याप्त नहीं है। शक्ति का उपयोग कब करना है, किस परिस्थिति में करना है और उसके पीछे उद्देश्य क्या है यह समझ...
शत्रु कमजोर दिखे तो क्या आगे बढ़ जाना चाहिए? आपके सामने एक अवसर है। सामने वाला कमजोर दिख रहा है। मन कहता है, अभी कदम उठा लेना चाहिए, वरन...
कामन्दकीय नीतिसार का श्लोक 42 मनुष्य के पतन के ऐसे कारणों की ओर संकेत करता है, जो बाहर से छोटे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उसकी शक्त...
कुलोद्भव शत्रु को जीतना कठिन क्यों होता है? यह प्रश्न प्राचीन भारतीय राजनीति के उस गहरे चिंतन की ओर ले जाता है, जहाँ शत्रु को केवल तलवार से...
कभी-कभी युद्ध शुरू होने से बहुत पहले ही उसका परिणाम तय होने लगता है। सामने वाला अधिक शक्तिशाली है, और सीधे टकराने का अर्थ नुकसान भी हो सकत...
जीवन में हर बार सीधा मुकाबला करना बुद्धिमत्ता नहीं होती। कई बार परिस्थितियाँ विपरीत होती हैं और सामने खड़ा प्रतिद्वंद्वी हमसे कहीं अधिक शक...
जब सामने वाला बहुत शक्तिशाली हो, तब कामन्दक क्या कहते हैं? हर लड़ाई लड़ना साहस नहीं होता। कई बार असली साहस यह पहचानना होता है कि इस समय ल...
राज्य के पास शक्ति हो तो सबसे आसान निर्णय अक्सर यही लगता है कि उस शक्ति का इस्तेमाल कर दिया जाए। लेकिन प्राचीन भारतीय राज्यनीति का एक महत्...