शत्रु को भीतर से कैसे तोड़ें? कामन्दक नीति
कामन्दक का 'नीतिसार' कौटिल्यीय अर्थशास्त्र की समृद्ध परम्परा का एक प्रामाणिक सार-संक्षेप है। इसके नवम सर्ग का शीर्षक 'अभियोगविध...
कामन्दक का 'नीतिसार' कौटिल्यीय अर्थशास्त्र की समृद्ध परम्परा का एक प्रामाणिक सार-संक्षेप है। इसके नवम सर्ग का शीर्षक 'अभियोगविध...
कामन्दक का 'नीतिसार' कौटिल्यीय अर्थशास्त्र की समृद्ध परम्परा का एक प्रामाणिक सार-संक्षेप है। इसके नवम सर्ग का शीर्षक 'अभियोगविध...
किसी पर विश्वास करना मनुष्य के जीवन की सबसे स्वाभाविक प्रवृत्तियों में से एक है। विश्वास से संबंध बनते हैं, संकोच दूर होता है और काम भी सह...
कुछ लोग बिना शोर मचाए, बिना अपनी ताकत दिखाए, चुपचाप किसी का भी भरोसा कैसे जीत लेते हैं? वो न तो चापलूसी करते हैं, न ही दबाव बनाते हैं फिर भ...
कामंदकीय नीतिसार भारतीय नीतिशास्त्र का एक प्रामाणिक ग्रन्थ है, जिसमें राजनीति, प्रशासन और व्यवहार-कुशलता के सूत्र संकलित हैं। इसका नवम सर्ग...
प्रायः यह मान लिया जाता है कि जो पक्ष संकट में होता है, उसे समझौते की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। वह अपनी रक्षा के लिए संधि का सहारा लेता ह...
नीतिशास्त्र का अध्ययन करते हुए कई बार ऐसा होता है कि कोई एक श्लोक आपको अचानक ठहरने पर मजबूर कर देता है। आप पन्ने पर आँखें गड़ाए सोचते रह जा...
जब दो बराबर ताकतवर लोग जब आपस में भिड़ जाएँ तो क्या होता है? न कोई जीतता है, न कोई हारता है, बस दोनों तबाह हो जाते हैं। यह कोई फ़िल्मी डायल...