कामन्दकीय नीतिसार: 9.69 निष्क्रिय शत्रु
सिंहासन कितना भी सुदृढ़ क्यों न हो, शासन अकेले राजा के बल पर नहीं टिकता। राजा की शक्ति उसके साथ काम करने वाले लोगों से आकार पाती है। राज्य ...
सिंहासन कितना भी सुदृढ़ क्यों न हो, शासन अकेले राजा के बल पर नहीं टिकता। राजा की शक्ति उसके साथ काम करने वाले लोगों से आकार पाती है। राज्य ...
सिंहासन कितना भी सुदृढ़ क्यों न हो, शासन अकेले राजा के बल पर नहीं टिकता। राजा की शक्ति उसके साथ काम करने वाले लोगों से आकार पाती है। राज्य ...
जब तलवार से भी तेज़ चलती है कलम मैं जब पहली बार कामन्दकीय नीतिसार के इस श्लोक पर रुका, तो मुझे ऐसा लगा मानो कोई हज़ारों वर्ष पुराना गुरु क...
कामन्दक का 'नीतिसार' कौटिल्यीय अर्थशास्त्र की समृद्ध परम्परा का एक प्रामाणिक सार-संक्षेप है। इसके नवम सर्ग का शीर्षक 'अभियोगविध...
किसी पर विश्वास करना मनुष्य के जीवन की सबसे स्वाभाविक प्रवृत्तियों में से एक है। विश्वास से संबंध बनते हैं, संकोच दूर होता है और काम भी सह...
कुछ लोग बिना शोर मचाए, बिना अपनी ताकत दिखाए, चुपचाप किसी का भी भरोसा कैसे जीत लेते हैं? वो न तो चापलूसी करते हैं, न ही दबाव बनाते हैं फिर भ...
कामंदकीय नीतिसार भारतीय नीतिशास्त्र का एक प्रामाणिक ग्रन्थ है, जिसमें राजनीति, प्रशासन और व्यवहार-कुशलता के सूत्र संकलित हैं। इसका नवम सर्ग...
प्रायः यह मान लिया जाता है कि जो पक्ष संकट में होता है, उसे समझौते की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। वह अपनी रक्षा के लिए संधि का सहारा लेता ह...