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कामंदकीय नीतिसार : समान शक्ति में संधि क्यों?

राजनीति में हर युद्ध इसलिए नहीं लड़ा जाता कि कोई पक्ष निश्चित रूप से जीत सकता है। कई बार युद्ध इसलिए शुरू होता है क्योंकि दोनों पक्ष अपनी श...

Anand Singh Dhami 7 सित॰, 2026

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कामंदकीय नीतिसार : समान शक्ति में संधि क्यों?

राजनीति में हर युद्ध इसलिए नहीं लड़ा जाता कि कोई पक्ष निश्चित रूप से जीत सकता है। कई बार युद्ध इसलिए शुरू होता है क्योंकि दोनों पक्ष अपनी श...

Anand Singh Dhami 7 सित॰, 2026

कामंदकीय नीतिसार: युद्ध या संधि?

जब किसी राज्य के सामने केवल दो ही मार्ग शेष रह जाते हैं; युद्ध या संधि तब सही निर्णय केवल इस बात से तय नहीं होता कि उसकी सैन्य शक्ति कितनी ...

Anand Singh Dhami 6 सित॰, 2026

कामंदकीय नीतिसार 9.58

संख्या और सेना के संबंध में कामंदक का यह सूत्र सीधा है, अल्पसैन्य पक्ष बड़े शत्रु को परास्त कर सकता है, लेकिन वे यहीं नहीं रुकते। उनके लिए...

Anand Singh Dhami 5 सित॰, 2026

कामंदकीय नीति: साहस से पहले आत्मपरीक्षण

किसी बड़ी मुश्किल के सामने खड़े होते ही हमारी नज़र अक्सर अपनी ताकत पर नहीं, बल्कि सामने खड़ी ताकत पर चली जाती है। सामने ज़्यादा लोग हों, ज़...

Anand Singh Dhami 4 सित॰, 2026

आत्मशक्ति से कैसे जीतें बड़ी चुनौतियाँ : कामंदकीय नीतिसार

जब सामने वाला आपसे बड़ा हो सामने वाला आपसे कहीं बड़ा हो, तो पहला सवाल यह नहीं होना चाहिए कि उसमें कितनी शक्ति है। पहला सवाल यह होना चाहिए...

Anand Singh Dhami 3 सित॰, 2026

प्रबल शत्रु से निपटने की नीति

राजा, राज्य और नीति-ग्रंथ की परंपरा प्राचीन भारतीय राजनीति-शास्त्र में राजा केवल शासक नहीं था, वह राज्य-तंत्र का केंद्र था। कामन्दकीय नी...

Anand Singh Dhami 2 सित॰, 2026

कामन्दकीय नीतिसार:राजनीति में नैतिकता

क्या सिंहासन की इच्छा पिता और पुत्र के बीच के रिश्ते को भी बदल सकती है? कामन्दकीय नीतिसार में एक श्लोक है, जो इस सवाल का सीधा, लेकिन असहज...

Anand Singh Dhami 1 सित॰, 2026