कामन्दकीय नीतिसार 10.8: क्षान्ति और उपेक्षा
कामन्दकीय नीतिसार का दशम सर्ग विग्रह और उसके प्रशमन के अनेक आयामों पर विचार करता है। आचार्य कामन्दक यहाँ यह स्पष्ट करते हैं कि संघर्ष का प्...
कामन्दकीय नीतिसार का दशम सर्ग विग्रह और उसके प्रशमन के अनेक आयामों पर विचार करता है। आचार्य कामन्दक यहाँ यह स्पष्ट करते हैं कि संघर्ष का प्...
कामन्दकीय नीतिसार का दशम सर्ग विग्रह और उसके प्रशमन के अनेक आयामों पर विचार करता है। आचार्य कामन्दक यहाँ यह स्पष्ट करते हैं कि संघर्ष का प्...
युद्ध और शांति का प्रश्न राजनीतिक चिंतन के आरंभ से ही महत्वपूर्ण रहा है। किसी संघर्ष को कब शांत करने का प्रयास किया जाए और कब उसका प्रत्यु...
कामन्दकीय नीतिसार, दशम सर्ग, श्लोक 6: विग्रह-प्रशमन की राजनीति कामन्दकीय नीतिसार के दशम सर्ग में विग्रह के कारणों और उनके प्रशमन पर विचा...
विग्रहयोनयः: कामन्दकीय नीतिसार में विग्रह के कारण राज्यों के बीच संघर्ष अचानक जन्म नहीं लेता। उसके पीछे कभी अधिकार का विवाद होता है, कभी ...
कामन्दकीय नीतिसार में विग्रह का अर्थ दो व्यक्तियों के बीच झगड़ा क्यों होता है? दो राष्ट्रों के बीच युद्ध क्यों छिड़ता है? क्या इसका कारण...
कामन्दकीय नीतिसार का नवम सर्ग (सन्धिविकल्पप्रकरणम्) भारतीय राजनय-परम्परा में संधि-विग्रह के सूक्ष्म वर्गीकरण, संधि-योग्य एवं अनुपयुक्त रा...