Homepage Indian Philosophy and Ethics

Featured Post

कामन्दकीय नीतिसार और युद्ध की अनिश्चितता

युद्ध में उतरने का निर्णय बाहर से जितना सीधा दिखाई देता है, भीतर से उतना ही जटिल होता है। किसी राजा या राज्य के सामने जब संघर्ष का विकल्प आ...

Anand Singh Dhami 21 सित॰, 2026

Latest Posts

कामन्दकीय नीतिसार और युद्ध की अनिश्चितता

युद्ध में उतरने का निर्णय बाहर से जितना सीधा दिखाई देता है, भीतर से उतना ही जटिल होता है। किसी राजा या राज्य के सामने जब संघर्ष का विकल्प आ...

Anand Singh Dhami 21 सित॰, 2026

नीतिसार 9.74: युद्ध टालें, शक्ति बचाएँ

राजनीति में संघर्ष कभी-कभी टाला नहीं जा सकता। लेकिन क्या हर विवाद का उत्तर संघर्ष ही होना चाहिए? कामन्दकीय नीतिसार 9.74 इसी प्रश्न को बहुत...

Anand Singh Dhami 20 सित॰, 2026

कामन्दकीय नीतिसार 9.73: युद्ध की कीमत

युद्ध शुरू करना केवल रणभूमि में सेना भेजने का निर्णय नहीं है। उसके साथ मनुष्य, धन, साधन और राज्य की स्थिरता भी दाँव पर लगती है। इसलिए किसी ...

Anand Singh Dhami 19 सित॰, 2026

नीतिसार: शत्रु पर वार का गुप्त नियम

कामन्दकीय नीतिसार का श्लोक 71 युद्ध में प्रत्यक्ष शक्ति के बजाय राजनीतिक संबंधों के उपयोग की एक रोचक स्थिति सामने रखता है। आक्रांत राजा को ...

Anand Singh Dhami 18 सित॰, 2026

शत्रु को बिना लड़ें कैसे हराएं? कामन्दकीय नीतिसार

बिना लड़े शत्रु को  युद्ध हराने की कला क्या है? एक शक्तिशाली शत्रु आपके राज्य पर चढ़ाई कर रहा है। आपकी सेना उसके मुकाबले कमजोर है। संसाध...

Anand Singh Dhami 17 सित॰, 2026

कामन्दकीय नीतिसार: 9.69 निष्क्रिय शत्रु

सिंहासन कितना भी सुदृढ़ क्यों न हो, शासन अकेले राजा के बल पर नहीं टिकता। राजा की शक्ति उसके साथ काम करने वाले लोगों से आकार पाती है। राज्य ...

Anand Singh Dhami 16 सित॰, 2026

शत्रु के प्रमुख को कैसे गिराएँ? कामन्दकीय नीति

जब तलवार से भी तेज़ चलती है कलम मैं जब पहली बार कामन्दकीय नीतिसार के इस श्लोक पर रुका, तो मुझे ऐसा लगा मानो कोई हज़ारों वर्ष पुराना गुरु क...

Anand Singh Dhami 15 सित॰, 2026