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कामन्दकीय नीतिसार: इन्द्रियजय

“यस्य प्रभावाद् भुवनं शाश्वते पथि तिष्ठति। देवः स जयति श्रीमान् दण्डधारो महीपतिः॥” यह श्लोक कामन्दकीय नीतिसार के इन्द्रियजयप्रकरणम् के आ...

Anand Singh Dhami 24 मई, 2026

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कामन्दकीय नीतिसार: इन्द्रियजय

“यस्य प्रभावाद् भुवनं शाश्वते पथि तिष्ठति। देवः स जयति श्रीमान् दण्डधारो महीपतिः॥” यह श्लोक कामन्दकीय नीतिसार के इन्द्रियजयप्रकरणम् के आ...

Anand Singh Dhami 24 मई, 2026

जीत से बड़ी शांति | कामन्दक नीति

क्या जीत से भी बड़ी है प्रजा की खुशी? अक्सर हम सफलता को युद्ध जीतने, प्रतिस्पर्धियों को पछाड़ने या शक्ति हासिल करने से मापते हैं। लेकिन क्...

Anand Singh Dhami 22 मई, 2026

हमारी संस्कृति जीवंत क्यों है?

क्या आपने कभी सोचा है कि पांच हजार साल पुरानी भारतीय लोक संस्कृति आज भी इतनी जीवंत कैसे है? जहां दुनिया की कई प्राचीन सभ्यताएं इतिहास के ...

Anand Singh Dhami 21 मई, 2026

कामन्दकीय नीतिसार: समान से संघर्ष

क्या जहर की काट जहर ही है दुनिया का एक शाश्वत नियम है। अत्यधिक शक्तिशाली तत्व को केवल उसके समान से संघर्ष करके ही नियंत्रित या पराजित किया...

Anand Singh Dhami 20 मई, 2026

श्रद्धा और भक्ति

क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपके पास सब कुछ है। नौकरी, परिवार, दोस्त फिर भी आप खालीपन महसूस करते हैं? यही वो सवाल है जो हर दूसरा इंसान ...

Anand Singh Dhami 19 मई, 2026