कामन्दकीय नीतिसार: शत्रु से विश्वास तक
सही निर्णय केवल शक्ति से नहीं, समझ से बनता है कामन्दकीय नीतिसार सर्ग 11 के श्लोक 33 से 35 राजनीति के उस पक्ष को सामने रखते हैं जहाँ केव...
सही निर्णय केवल शक्ति से नहीं, समझ से बनता है कामन्दकीय नीतिसार सर्ग 11 के श्लोक 33 से 35 राजनीति के उस पक्ष को सामने रखते हैं जहाँ केव...
सही निर्णय केवल शक्ति से नहीं, समझ से बनता है कामन्दकीय नीतिसार सर्ग 11 के श्लोक 33 से 35 राजनीति के उस पक्ष को सामने रखते हैं जहाँ केव...
प्राचीन भारत में ऐसा कई बार हुआ। धर्मराज युधिष्ठिर द्यूत में अपना राज्य, कोष और सेना, सब कुछ हार चुके थे। उनके पास न शक्ति बची थी, न सहारा...
राजनीति में हर निर्णय सीधा नहीं होता। कई बार किसी शासक को एक ही समय में अलग-अलग पक्षों के साथ अलग नीति अपनानी पड़ती है। द्वैधीभाव इसी जटि...
प्राचीन भारतीय राजनीति में राज्य-सुरक्षा का प्रश्न केवल बल से नहीं, बल्कि सूक्ष्म कूटनीति से हल होता था। जब किसी राजा के राज्य की सीमाओं पर...
क्या हर स्थिति में तुरंत जवाब देना जरूरी होता है? कभी-कभी चुप रहना, पीछे हट जाना या जानबूझकर किसी बात को नजरअंदाज करना सबसे विवेकपूर्ण निर...
जीवन में हम अक्सर किसी निश्चित लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं। रास्ता तय होता है, दिशा स्पष्ट होती है, मन में संकल्प होता है। लेकिन बीच रास्ते में...
किसी बड़े संकट के सामने अकेले खड़ा होना हमेशा बुद्धिमानी नहीं होती। कभी-कभी दो ऐसे पक्ष, जिनके अपने मतभेद हैं, किसी तीसरी अधिक शक्तिशाली सत...
क्या युद्ध में हार से बचने का सबसे समझदार तरीका कभी-कभी रुक जाना होता है? प्राचीन भारतीय युद्धनीति के आचार्य कामन्दक ने कामन्दकीय नीतिसार...