शत्रु की संधि चाल: कामंदकीय नीतिसार
प्रायः यह मान लिया जाता है कि जो पक्ष संकट में होता है, उसे समझौते की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। वह अपनी रक्षा के लिए संधि का सहारा लेता ह...
प्रायः यह मान लिया जाता है कि जो पक्ष संकट में होता है, उसे समझौते की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। वह अपनी रक्षा के लिए संधि का सहारा लेता ह...
प्रायः यह मान लिया जाता है कि जो पक्ष संकट में होता है, उसे समझौते की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। वह अपनी रक्षा के लिए संधि का सहारा लेता ह...
नीतिशास्त्र का अध्ययन करते हुए कई बार ऐसा होता है कि कोई एक श्लोक आपको अचानक ठहरने पर मजबूर कर देता है। आप पन्ने पर आँखें गड़ाए सोचते रह जा...
जब दो बराबर ताकतवर लोग जब आपस में भिड़ जाएँ तो क्या होता है? न कोई जीतता है, न कोई हारता है, बस दोनों तबाह हो जाते हैं। यह कोई फ़िल्मी डायल...
राजनीति में हर युद्ध इसलिए नहीं लड़ा जाता कि कोई पक्ष निश्चित रूप से जीत सकता है। कई बार युद्ध इसलिए शुरू होता है क्योंकि दोनों पक्ष अपनी श...
जब किसी राज्य के सामने केवल दो ही मार्ग शेष रह जाते हैं; युद्ध या संधि तब सही निर्णय केवल इस बात से तय नहीं होता कि उसकी सैन्य शक्ति कितनी ...
संख्या और सेना के संबंध में कामंदक का यह सूत्र सीधा है, अल्पसैन्य पक्ष बड़े शत्रु को परास्त कर सकता है, लेकिन वे यहीं नहीं रुकते। उनके लिए...
किसी बड़ी मुश्किल के सामने खड़े होते ही हमारी नज़र अक्सर अपनी ताकत पर नहीं, बल्कि सामने खड़ी ताकत पर चली जाती है। सामने ज़्यादा लोग हों, ज़...