आत्मा, मन और इन्द्रियों की प्रेरणा से इच्छाओं की पूर्ति
कभी ऐसा महसूस हुआ कि मन बहुत कुछ चाहता है, पर कदम आगे नहीं बढ़ते? कामन्दकी नीतिसार इसी सवाल का साफ उत्तर देता है, इच्छाएँ तब पूरी हो...
कभी ऐसा महसूस हुआ कि मन बहुत कुछ चाहता है, पर कदम आगे नहीं बढ़ते? कामन्दकी नीतिसार इसी सवाल का साफ उत्तर देता है, इच्छाएँ तब पूरी हो...