मन को स्थिर करने के पाँच प्रभावी तरीके
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| शांत भारतीय परिवेश में ध्यान करता हुआ व्यक्ति |
परिचय
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मन का अस्थिर होना आम बात है। काम की व्यस्तता, बदलता माहौल, लगातार स्क्रीन का इस्तेमाल और रोजमर्रा की चिंताएँ मन को थका देती हैं। कई लोग ध्यान लगाना चाहते हैं, लेकिन समझ नहीं आता कि शुरुआत कहाँ से करें। परंपरागत भारतीय ग्रंथों में मन को स्थिर रखने के सरल उपाय बताए गए हैं, जिनका असर आज भी वैसा ही है। उन ग्रंथों में से एक ग्रन्थ जो आज इतिहास से के पन्नों में लगभग खो चुका है। या फिर हमें बताया ही नहीं गया। लेकिन ऐसा क्यों हुआ, इस पर गौर करनी वाली बात है। उन ग्रंथों में से आज हम बताने की कोशिश कर रहे है, भोज ग्रंथ ! वैसे तो मन यानि दिमाग को हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही देखते है क्या हमें पता है कि, हमारे ग्रंथों ने उसके बारे में हजारों वर्ष पहले ही बता दिया था। चलो देखते है कि भोज ग्रंथ का एक अंश जो है, राजमार्तण्ड (योगसूत्र-टीका) जो मन को स्थिर करने के तरीके बताता हैं।
इस ब्लॉग में हम पाँच ऐसे तरीकों पर बात कर रहे हैं जो आसान भी हैं और असरदार भी। इन्हें कोई भी व्यक्ति बिना किसी विशेष तैयारी के अपना सकता है।
सांस पर ध्यान देना: मन को शांत करने का सबसे सीधा तरीका
सांस पर ध्यान लगाने की तकनीक प्राचीन समय से आज तक सबसे विश्वसनीय मानी गई है। यह शरीर और मन के बीच सीधा संबंध बनाती है।
कैसे करें:
- बस सामान्य सांस को महसूस करें।
- न उसे बदलें, न नियंत्रित करें।
- जब भी मन भटके, ध्यान धीरे से फिर सांस पर ले आएं।
क्यों असर करता है:
- सांस धीमी और सहज होने लगती है, जिससे दिमाग को आराम मिलता है। यह तनाव कम करता है, एकाग्रता बढ़ाता है और तुरंत शांति देता है।
इंद्रियों को संयम में रखना: बाहरी शोर को कम करके भीतर की शांति पाना
हमारी इंद्रियाँ लगातार प्रभाव लेती हैं तेज आवाज, तेज रोशनी, बैक-टू-बैक नोटिफिकेशन, स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग। ये सब मिलकर मन को बेचैन करते हैं।
क्या करें:
- थोड़ी देर के लिए फोन को साइलेंट पर रखें।
- काम के समय अनावश्यक शोर से दूर रहें।
- सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन से दूरी बनाएं।
फ़ायदा:
- इंद्रियों पर हल्का संयम भी मन की उथल-पुथल को कम कर देता है। इससे ध्यान बनाए रखना आसान होता है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।
विचारों को साक्षीभाव से देखना: मन को हल्का और साफ रखने की कला
- मन में हर पल विचार आते-जाते रहते हैं।
- समस्या तब होती है जब हम उनमें उलझ जाते हैं।
- साक्षीभाव का मतलब है विचारों को बस आते-जाते देखना, बिना प्रतिक्रिया दिए।
कैसे करें:
- आँखें बंद करें और विचारों को वैसे ही देखें जैसे बादल गुजरते हैं।
- किसी विचार को पकड़ने या रोकने की कोशिश न करें।
- कुछ मिनट बाद महसूस होगा कि वे खुद धीमे होने लगे हैं।
क्यों असरदार है:
- यह अभ्यास मानसिक बोझ कम करता है। दिमाग शांत होता है और प्रतिक्रियाएँ संतुलित होती हैं।
शरीर को स्थिर रखना: शारीरिक स्थिरता से मानसिक स्थिरता
- शरीर का हिलना-डुलना मन को भी भटकाता है। जब शरीर शांत बैठता है, मन धीरे-धीरे उसी दिशा में चलता है।
कैसे करें:
- आरामदायक मुद्रा में बैठें।
- पीठ सीधी लेकिन तनावरहित रखें।
- कुछ मिनट तक शरीर को स्थिर रखें।
क्या महसूस होगा:
- धीरे-धीरे मन शांत होने लगता है। यह तरीका ध्यान की शुरुआत करने वालों के लिए बेहद उपयोगी है।
उद्देश्य का स्मरण: भटकते मन को वापस लाने की सरल प्रक्रिया
- दिनभर में मन बार-बार भटकता है।
- छोटी-सी बात भी ध्यान को खींच लेती है।
- उद्देश्य का स्मरण मन को दिशा देता है।
क्या करें:
- अपने वर्तमान कार्य का उद्देश्य साफ रखें।
- जब भी ध्यान टूटे, सेकंड भर के लिए लक्ष्य याद करें।
- इसे दिनभर में कई बार दोहराएं।
फ़ायदा:
- मन दोबारा केंद्रित हो जाता है। काम तेजी और साफ सोच के साथ होता है।
इन सभी तरीकों को अपनाने का वास्तविक लाभ
- मन शांत और संतुलित होने लगता है
- तनाव और बेचैनी कम होती है
- निर्णय लेना आसान होता है
- नींद बेहतर होती है
- ध्यान और एकाग्रता स्वाभाविक रूप से बढ़ती है
इन पाँचों में कोई जटिलता नहीं है। किसी एक तरीके से भी शुरुआत करेंगे तो कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होगा। जैसे-जैसे नियमितता बनती है, मन स्थिर, साफ और हल्का होने लगता है।
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निष्कर्ष
हम सभी एक शांत और संतुलित मन चाहते हैं, लेकिन उसके लिए बड़े उपाय जरूरी नहीं होते। सांस की जागरूकता, इंद्रियों का संयम, विचारों का साक्षीभाव, शरीर की स्थिरता और उद्देश्य का स्मरण ये पाँच तरीके जीवन में गहरा बदलाव ला सकते हैं। इनमें से किसी एक से शुरुआत करें और आगे बढ़ते जाएँ।
प्रश्नोत्तर
प्र. क्या ये तरीके ध्यान सीखने से पहले भी काम आएंगे?
हाँ, ये शुरुआती लोगों के लिए सबसे सरल और प्रभावी उपाय हैं।
प्र. कितना समय देना होगा?
5–10 मिनट भी रोज़ करेंगे तो फर्क दिखेगा।
प्र. क्या इन्हें कहीं भी किया जा सकता है?
हाँ, अधिकतर तरीके यात्रा, ऑफिस, घर हर जगह अपनाए जा सकते हैं।
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पाठकों के लिए सुझाव
- एक समय में केवल एक तकनीक चुनें
- शुरुआत छोटे समय से करें
- अपने अनुभव को नोट करें
- हड़बड़ी न करें, मन को समय दें
