सूरज हर दिन ठीक समय पर क्यों उगता है? नदियाँ अपना रास्ता क्यों नहीं बदलतीं? और एक अच्छा कर्म करने पर खुशी क्यों मिलती है, जबकि बुराई करने पर अंततः दुख ही हाथ लगता है? ऋग्वेद में इन सबका एक ही उत्तर है - ऋत (Rta)। ऋत वह ब्रह्मांडीय और नैतिक व्यवस्था है, जो पूरी सृष्टि को नियमबद्ध चलाती है। लेकिन ऋत कोई रूखा नियम नहीं है; यह एक जीवंत कर्तव्यबोध है। इसी ऋत को व्यवहार में उतारने के लिए हमारे ऋषियों ने तीन ऋण (देव, ऋषि, पितृ) की अवधारणा दी। हर व्यक्ति जन्म के साथ इन तीन ऋणों से बंधा होता है, और इन्हें चुकाना ही नैतिक जीवन है। आज जब दुनिया जलवायु संकट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनैतिक उपयोग, और अकेले बुजुर्गों से भरी हुई है, यह प्राचीन ज्ञान हमें एक सशक्त मार्गदर्शन देता है।भारतीय नीतिशास्त्र के इस लेख में ऋत और तीन ऋणों को विस्तार से समझें - रामायण, महाभारत, आधुनिक घटनाओं और वैश्विक उदाहरणों के साथ।
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| ऋत ब्रह्मांड की नैतिक डोर; तीन ऋण उस डोर को थामने के हाथ। |
ऋत (Rta) क्या है? - वह ब्रह्मांडीय व्यवस्था जिस पर टिका है सब कुछ
ऋत ऋग्वेद का सबसे प्राचीन और गहन सिद्धांत है। यह न तो कोई देवता है और न ही कोई कानून। यह एक सार्वभौमिक नैतिक-प्राकृतिक व्यवस्था है। जैसे गुरुत्वाकर्षण भौतिक जगत को संभाले रखता है, वैसे ही ऋत नैतिक और भौतिक जगत को एक साथ नियंत्रित करता है। ऋत के कारण ही सूर्य उदय और अस्त होता है, ऋत के कारण ही ऋतुएँ बदलती हैं, और ऋत के कारण ही सत्य की हमेशा जीत होती है। जो व्यक्ति या समाज ऋत के विरुद्ध जाता है, वह अंततः विनाश को प्राप्त होता है।- प्राकृतिक आयाम: ऋत का अर्थ है - ब्रह्मांड का नियम। वैज्ञानिक इसे 'भौतिकी के नियम' कहते हैं। प्राचीन भारत में यही सोच थी कि नियम बिना किसी देवता के हस्तक्षेप के चलते हैं।
- नैतिक आयाम: ऋत का अर्थ यह भी है कि असत्य और अधर्म का फल अवश्य मिलता है - चाहे देर से ही क्यों न हो। यह 'कर्म' के सिद्धांत का आधार है।
- सामाजिक आयाम: ऋत ही है जो समाज को अराजकता से बचाती है। राजा को धर्म से चलना चाहिए, व्यापारी को सत्य से, और गुरु को करुणा से।
- समसामयिक उदाहरण: 2025 की शुरुआत में विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार से सालाना 2.6 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होता है - यह ऋत के उल्लंघन का प्रत्यक्ष परिणाम है।
- विद्वत दृष्टिकोण: प्रो. फ्रित्ज स्टाल (ऑक्सफर्ड) ने अपनी पुस्तक 'The Cosmic Order' में लिखा, "ऋत ही वैदिक धर्म की धुरी है; इसे समझे बिना ऋग्वेद का कोई मंत्र समझ में नहीं आता।"
- दक्षिण कोरिया का 'हान' दर्शन - जहाँ सामूहिक अन्याय को सहने की शक्ति ही अंततः परिवर्तन लाती है।यह ऋत के सिद्धांत के समान है: असत्य टिकता नहीं।
क्या महाभारत का युद्ध ऋत के उल्लंघन का परिणाम था?
महाभारत का संपूर्ण कथानक ऋत की स्थापना और उसके उल्लंघन के इर्द-गिर्द घूमता है। जब दुर्योधन ने पांडवों का राज्य छीना, द्रौपदी का चीरहरण किया, और ऋषियों का अपमान किया। तो उसने ऋत की तीनों परतों को तोड़ा: प्राकृतिक (न्याय का अभाव), नैतिक (असत्य), और सामाजिक (दुष्टों का संरक्षण)।- दुर्योधन की मृत्यु - श्रीकृष्ण ने उसे गीता में सिखाया कि जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है। दुर्योधन के सभी गुरु (द्रोण, कृपाचार्य) उसके साथ थे, फिर भी वह हारा क्योंकि ऋत उसके विरुद्ध थी।
- युधिष्ठिर ने युद्ध के बाद अश्वमेध यज्ञ किया। यह ऋत को फिर से स्थापित करने का एक सांकेतिक कर्म था।
- डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने अपने लेखन में कहा कि महाभारत केवल कथा नहीं, बल्कि ऋत के उल्लंघन का एक केस स्टडी है। जब सत्ता नैतिकता से अलग हो जाती है, तो विनाश निश्चित है।
क्या रामायण में रावण ऋत का उल्लंघनकर्ता था, और आज के तानाशाहों से उसकी तुलना कैसे की जा सकती है?
रावण एक ब्रह्मज्ञानी, शिवभक्त और महान विद्वान था। फिर भी उसने ऋत का उल्लंघन किया। उसने सीता का हरण किया, वेदों के विरुद्ध बलात्कार जैसी घटना को बढ़ावा दिया, और ऋषियों को प्रताड़ित किया। परिणाम उसकी सोने की लंका जलकर राख हो गई। आज के संदर्भ में, रावण उन तानाशाहों और भ्रष्ट नेताओं का प्रतीक है जो ऋत को दबाने का प्रयास करते हैं। जैसे पुतिन (यूक्रेन युद्ध), किम जोंग उन, या अफगानिस्तान में तालिबान। उनकी सेनाएँ शक्तिशाली हो सकती हैं, लेकिन ऋत उनका साथ नहीं देती।- 2024 के अंत में सीरिया में बशर अल-असद के शासन के पतन को देखें। 24 साल का अत्याचार समाप्त हुआ। यह ऋत का एक आधुनिक प्रमाण है: जो बहुत दिनों तक ऋत को रौंदता है, वह अन्ततः रौंद दिया जाता है।
- प्रो. वेंकटरामन (मद्रास विश्वविद्यालय) कहते हैं, "रामायण ऋत का महाकाव्य है। हर पात्र को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है, यहाँ तक कि राम को भी वनवास।"
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| रावण ने ऋत को तोड़ा, राम ने पुनः स्थापित किया, यह सनातन नियम है। |
तीन ऋण (देव, ऋषि, पितृ) कैसे ऋत को व्यावहारिक बनाते हैं?
यदि ऋत ब्रह्मांडीय व्यवस्था है, तो तीन ऋण उस व्यवस्था को जीने का साधन हैं। ऋग्वेद के बाद के ग्रंथों (तैत्तिरीय संहिता, शतपथ ब्राह्मण) में स्पष्ट कहा गया है कि हर मनुष्य जन्म से तीन ऋणों से बंधा होता है। इन्हें चुकाए बिना कोई भी मोक्ष या समाज में शांति प्राप्त नहीं कर सकता।- देव ऋण: प्रकृति, देवताओं, वायु, जल, अग्नि के प्रति। इसे चुकाने का तरीका यज्ञ, पूजा, पर्यावरण संरक्षण।
- ऋषि ऋण: गुरुओं, शिक्षकों, ज्ञान-दाताओं के प्रति। इसे चुकाने का तरीका स्वयं शिक्षा देना, ग्रंथों का संरक्षण, असत्य का खंडन।
- पितृ ऋण: माता-पिता, पूर्वजों, समाज के प्रति। इसे चुकाने का तरीका सेवा, संतानोत्पत्ति, पिंडदान, और सामाजिक उत्तरदायित्व।
- 2024 की विश्व खुशहाली रिपोर्ट के अनुसार, जिन देशों में पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा मजबूत है (जैसे फिनलैंड, डेनमार्क), वहाँ लोग अधिक खुश हैं। यह सामूहिक रूप से तीन ऋण चुकाने का परिणाम है।
- कोस्टा रिका ने 2024 में प्रकृति को कानूनी अधिकार देने वाला एक और कानून पारित किया। यह देव ऋण को राष्ट्रीय स्तर पर चुकाने का अनोखा उदाहरण है।
क्या देव ऋण केवल यज्ञ-हवन तक सीमित है, या पर्यावरण बचाना भी यही है?
यह एक आम गलतफहमी है कि देव ऋण सिर्फ अग्निहोत्र या पशुबलि से चुकता है। वास्तव में, ऋग्वेद कहता है कि देवताओं को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा माध्यम है। प्रकृति की रक्षा करना। यज्ञ केवल एक प्रतीक था, असली देव ऋण है। जल, वायु, भूमि को प्रदूषित न करना।- महाभारत: अर्जुन ने इंद्र से दिव्यास्त्र प्राप्त किए, लेकिन बदले में उसने इंद्र के वनों की रक्षा की और यज्ञ कराया। आज के संदर्भ में, इंद्र का अर्थ है। जल संसाधन। बारिश को रोकने वाले पेड़ कट रहे हैं। यह देव ऋण का उल्लंघन है।
- 2025 में चेन्नई में भीषण बाढ़ आई, क्योंकि शहर के तालाबों पर कब्जा किया गया था। यह देव ऋण न चुकाने की कीमत थी।
- स्वीडन की 'फ्लाइट शेम' (flygskam) मुहिम लोग हवाई यात्रा छोड़ रहे हैं। हर उड़ान से उत्सर्जन बढ़ता है। एक व्यक्ति जो ट्रेन से यात्रा करता है, वह देव ऋण चुका रहा है।
- प्रो. वंदना शिवा (पर्यावरणविद्) कहती हैं, "बीज बचाना, पेड़ लगाना, और स्थानीय नदियों को साफ करना यही आज का यज्ञ है।"
क्या ऋषि ऋण चुकाने का मतलब केवल गुरु को दक्षिणा देना है? एकलव्य और कर्ण से क्या सीखें?
ऋषि ऋण केवल शिक्षक को दिए गए धन या वस्त्र तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक अर्थ है। ज्ञान का प्रसार करना, अज्ञान को दूर करना, और सत्य को बोलना। एकलव्य और कर्ण दोनों ने ऋषि ऋण चुकाने का प्रयास किया, लेकिन परिणाम बिल्कुल अलग आए।- एकलव्य: उसने द्रोणाचार्य को कभी देखा भी नहीं, फिर भी उसने मिट्टी की मूर्ति बनाकर अभ्यास किया। जब द्रोण ने दक्षिणा में उसका अंगूठा माँगा, तो एकलव्य ने बिना किसी द्वेष के दे दिया। उसने ऋषि ऋण को विनम्रता और सच्ची श्रद्धा से चुकाया उनका नाम अमर हो गया।
- कर्ण: परशुराम से अस्त्र सीखे, लेकिन झूठ बोलकर कि वह ब्राह्मण है। जब सत्य प्रकट हुआ, तो परशुराम ने उसे श्राप दिया कि संकट के समय अस्त्र विफल होगा। कर्ण का ऋषि ऋण अधूरा रहा उसकी मृत्यु इसी श्राप के कारण हुई।
- आप किसी शिक्षक को महँगा उपहार दे सकते हैं, लेकिन यदि आप स्वयं गलत जानकारी फैलाते हैं या फर्जीवाड़ा करते हैं, तो आप ऋषि ऋण को तोड़ रहे हैं। 2024 के भारतीय चुनावों में AI से बने डीपफेक वीडियो एक बड़ी समस्या थे जिन्होंने उन्हें रोका, उन्होंने ऋषि ऋण चुकाया।
- फिनलैंड की शिक्षा प्रणाली जहाँ शिक्षकों को डॉक्टरों के बराबर सम्मान मिलता है। वह राष्ट्रीय स्तर पर ऋषि ऋण चुकाने का उदाहरण है। फिनलैंड के छात्र दुनिया के सबसे खुश छात्र हैं।
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| एकलव्य ने विनम्रता से ऋषि ऋण चुकाया, कर्ण ने झूठ से - परिणाम आप सब जानते हैं। |
पितृ ऋण - क्या केवल पिंडदान और श्राद्ध से काम चल जाता है, या इससे बड़ा कुछ है?
पितृ ऋण हमारे माता-पिता, दादा-दादी, और समस्त पूर्वजों के प्रति है। यह केवल एक दिन के श्राद्ध कर्म से नहीं चुकता। असली पितृ ऋण चुकाना है। अपने बुजुर्गों की जीवित रहते सेवा करना, उनके संस्कारों को आगे बढ़ाना, और समाज के उन सदस्यों की मदद करना जिनके अपने नहीं हैं।- रामायण: श्रीराम ने अपने पिता दशरथ के वचन का पालन करने के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। उन्होंने पितृ ऋण को केवल पिंडदान से नहीं, बल्कि आज्ञापालन से चुकाया।
- महाभारत: पांडवों ने युद्ध के बाद पितरों का तर्पण किया, लेकिन उससे पहले उन्होंने अपनी माँ कुंती की सेवा की और जब कुंती ने कर्ण को मरने से पहले सच बताया, तो पांडवों ने उसे क्षमा किया।
- 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 1,800 से अधिक वृद्धाश्रम हैं, और उनमें रहने वाले 60% बुजुर्गों के बच्चे विदेशों में रहते हैं। यह पितृ ऋण का एक दुखद उल्लंघन है।
- जापान का 'ओबोन' त्योहार, जहाँ पूर्वजों की आत्मा का स्वागत किया जाता है, और 'रोजर केयर' प्रणाली यह दर्शाती है कि पितृ ऋण को सांस्कृतिक और राजकीय स्तर पर भी चुकाया जा सकता है।
- स्वामी विवेकानंद ने कहा था, "पितृ ऋण चुकाने का सबसे बड़ा तरीका है। देश सेवा, क्योंकि पूरी मानवता आपकी पितृ परंपरा है।"
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| अपने बुजुर्गों की सेवा करना भारत में पितृ ऋण है, और जापान में ओबोन त्योहार - दोनों एक ही सत्य की ओर इशारा करते हैं। |
ऋत और तीन ऋण - आज के भारत और दुनिया में इनकी प्रासंगिकता क्यों बढ़ गई है?
आज हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं, जहाँ प्रकृति चीख रही है, ज्ञान के नाम पर फर्जीवाड़ा हो रहा है, और बुजुर्ग अकेले मर रहे हैं। यह सब इसलिए है क्योंकि हम ऋत से दूर होते जा रहे हैं, और तीन ऋणों को भूल चुके हैं। लेकिन अच्छी खबर यह है कि दुनिया भर में इस दिशा में आंदोलन शुरू हो गए हैं।- जलवायु परिवर्तन: IPCC 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, यदि तापमान 1.5°C से अधिक बढ़ा, तो भारत के तटीय शहर (मुंबई, चेन्नई) डूब जाएँगे। देव ऋण चुकाना अब एक आवश्यकता है।
- AI और डीपफेक: 2025 में संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी कि AI से बनाए गए फर्जी वीडियो लोकतंत्र को खत्म कर सकते हैं। ऋषि ऋण चुकाने का मतलब अब – सत्य की जाँच करना, मिथक न फैलाना।
- बुजुर्गों का संकट: भारत में 2025 तक 65+ जनसंख्या 20% हो जाएगी। पितृ ऋण चुकाने के लिए ठोस सामाजिक नीतियाँ चाहिए जैसे जापान में।
- 'फ्राइडे फॉर फ्यूचर' (ग्रेटा थुनबर्ग) युवा देव ऋण चुकाने के लिए सड़कों पर हैं। 'विकिपीडिया' और 'इंटरनेट आर्काइव' ये ऋषि ऋण के वैश्विक संस्थान हैं। 'ग्लोबल एलायंस फॉर एजिंग' यह सामूहिक पितृ ऋण चुकाने का प्रयास है।
क्या आधुनिक विज्ञान ऋत के सिद्धांत को मानता है?
आधुनिक भौतिकी के नियम जैसे गुरुत्वाकर्षण, ऊष्मागतिकी के नियम, और क्वांटम यांत्रिकी की समरूपता ठीक वैसी ही 'बिना किसी चूक वाली व्यवस्था' है, जैसी ऋत थी। वैज्ञानिक इसे 'लॉज़ ऑफ नेचर' कहते हैं, जबकि ऋषि इसे 'ऋत' कहते थे।- न्यूटन के गति के तीन नियम - यदि कोई वस्तु ऋत का उल्लंघन करने की कोशिश करे (जैसे गुरुत्वाकर्षण को मात देना), तो वह नष्ट हो जाएगी। ठीक वैसे ही जैसे दुर्योधन ऋत को मात नहीं दे सका।
- स्टीफन हॉकिंग ने लिखा, "ब्रह्मांड का एक नियम है, और हम उस नियम के अधीन हैं।" यह लगभग ऋत की ही परिभाषा है।
- प्रो. जे. सी. कपूर (न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी) ने अपने शोध में बताया कि प्राचीन भारतीय ऋत और आधुनिक भौतिकी के मूल नियमों में अद्भुत समानता है। फर्क सिर्फ इतना है, ऋत में नैतिकता भी शामिल थी, जबकि विज्ञान उदासीन है।
एक व्यक्ति के तौर पर मैं ऋत और तीन ऋणों को रोजमर्रा में कैसे अपना सकता हूँ?
आपको महायज्ञ करने या हिमालय जाने की जरूरत नहीं है। छोटे-छोटे कदम ही ऋत को जीवित रखते हैं।- देव ऋण के लिए: एक पेड़ लगाएँ, प्लास्टिक कम करें, अनावश्यक पानी न बहाएँ, यदि संभव हो तो सोलर पैनल लगवाएँ।
- ऋषि ऋण के लिए: किसी गरीब बच्चे को ट्यूशन पढ़ाएँ, फर्जी खबरें आगे न भेजें, किसी अच्छी पुस्तक को दान करें, या खुद एक ऑनलाइन कोर्स बनाकर मुफ्त में दें।
- पितृ ऋण के लिए: हर दिन अपने माता-पिता से बात करें, उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखें, पड़ोस के किसी अकेले बुजुर्ग की मदद करें, और अपने बच्चों को परिवार का इतिहास बताएँ।
- केरल के 'मुवत्तुपुझा' गाँव के लोगों ने मिलकर एक नदी को साफ किया (देव ऋण), वहाँ एक सामुदायिक पुस्तकालय खोला (ऋषि ऋण), और एक वृद्धाश्रम को गोद लिया (पितृ ऋण)। आज वह गाँव पूरे भारत में आदर्श है।
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| केरल का मुवत्तुपुझा – जहाँ देव ऋण को सामूहिक कर्तव्य बनाया गया। |
सारणी: ऋत और तीन ऋणों का एक नज़र में तुलनात्मक विवरण
| अवधारणा | मूल स्रोत | परिभाषा | किसके प्रति उत्तरदायित्व | आधुनिक समकक्ष | रामायण/महाभारत उदाहरण | अंतरराष्ट्रीय उदाहरण |
|---|---|---|---|---|---|---|
| ऋत (Rta) | ऋग्वेद | ब्रह्मांडीय नैतिक-प्राकृतिक व्यवस्था | सारी सृष्टि के प्रति | भौतिकी के नियम + सार्वभौमिक नैतिकता | राम द्वारा रावण का वध; दुर्योधन का अंत | कोस्टा रिका का Rights of Nature कानून |
| देव ऋण | तैत्तिरीय संहिता | देवताओं/प्रकृति का ऋण | सूर्य, अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी | पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, यज्ञ | अर्जुन द्वारा इंद्र के वनों की रक्षा | स्वीडन की फ्लाइट शेम मुहिम |
| ऋषि ऋण | शतपथ ब्राह्मण | गुरुओं/ज्ञान का ऋण | ऋषि, शिक्षक, वैज्ञानिक, कलाकार | सत्य प्रसार, फर्जी खबरों का खंडन, शिक्षा दान | एकलव्य की गुरुभक्ति; कर्ण का श्राप | फिनलैंड की शिक्षा प्रणाली |
| पितृ ऋण | गृह्यसूत्र | पूर्वजों/माता-पिता का ऋण | माता-पिता, दादा-दादी, पूर्वज, समाज | वृद्ध सेवा, संस्कारों का पालन, वंश विस्तार | श्रीराम का वनवास; पांडवों द्वारा कुंती सेवा | जापान का ओबोन त्योहार और रोजर केयर |
निष्कर्ष
ऋत और तीन ऋण ये दो स्तंभ भारतीय दर्शन के केंद्र में हैं। ऋत हमें याद दिलाती है कि यह ब्रह्मांड कोई अराजक जगह नहीं है; यहाँ हर कर्म का हिसाब है, हर झूठ का पर्दाफाश होता है, और सत्य की हमेशा जीत होती है। और तीन ऋण (देव, ऋषि, पितृ) हमें यह बताते हैं कि उस ऋत को व्यक्तिगत, सामाजिक और वैश्विक स्तर पर कैसे जीया जाए। आज जब दुनिया जलवायु आपदा, सूचना के युद्ध, और बुजुर्गों के अकेलेपन से जूझ रही है, तो हमें वापस ऋग्वेद की ओर लौटना होगा। न तो कोई नई तकनीक हमें बचाएगी, न कोई विदेशी विचारधारा। बचाएगा तो केवल यह प्राचीन ज्ञान कि हम सब ऋत से बंधे हैं, और हमारा कर्तव्य है कि हम देव, ऋषि और पितृ का ऋण उतारें। एक पेड़ लगाकर, एक सच बोलकर, एक बुजुर्ग की सेवा करके। यही नैतिक जीवन है, यही सच्ची मुक्ति है।अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या ऋत और धर्म एक ही हैं?ऋत ब्रह्मांडीय व्यवस्था है, जबकि धर्म उस व्यवस्था का मानवीय पालन करने का साधन है, धर्म ऋत से उत्पन्न होता है।
2. क्या तीनों ऋणों का उल्लेख सीधे ऋग्वेद में मिलता है?
ऋत का उल्लेख ऋग्वेद में है, जबकि तीन ऋणों का स्पष्ट वर्णन तैत्तिरीय संहिता और शतपथ ब्राह्मण में मिलता है।
3. क्या स्त्रियों पर भी ऋत और तीन ऋण लागू होते हैं?
ऋत और तीनों ऋण सभी मनुष्यों पर जन्म से लागू होते हैं, चाहे लिंग, जाति या वर्ग कुछ भी हो।
4. क्या केवल धन देकर तीनों ऋण चुकाए जा सकते हैं?
धन केवल एक सहायक साधन है। असली ऋण चुकाना है, सम्मान, सेवा, सत्य, विनम्रता, और समय देना।
5. यदि मेरे माता-पिता मुझसे दूर रहते हैं, तो पितृ ऋण कैसे चुकाऊँ?
नियमित फोन कॉल, उनके खर्चे उठाना, छुट्टी में उनसे मिलना, और किसी बुजुर्ग की मदद करना ये सब पितृ ऋण में आते हैं।
विज्ञान के नियम (भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान) ऋत का ही आधुनिक रूप हैं, बस विज्ञान नैतिकता को शामिल नहीं करता, जबकि ऋत करता है।
7. क्या कोई व्यक्ति बिना ऋण चुकाए मोक्ष प्राप्त कर सकता है?
प्रमुख भारतीय दर्शनों (जैसे मीमांसा) में ऋण चुकाना मोक्ष के लिए आवश्यक माना गया है, जबकि कुछ अद्वैत परंपराओं में ज्ञान को प्राथमिकता दी गई है।
अंतिम विचार
ऋत और तीन ऋण हमें सिखाते हैं कि हम अलग-थलग नहीं हैं। हम प्रकृति, ज्ञान और परिवार से जुड़े हैं। इन रिश्तों को सम्मान देना ही धर्म है।आह्वान
आज ही एक डायरी लें और लिखें, इस सप्ताह मैं देव ऋण के लिए क्या करूँगा (एक पेड़? प्लास्टिक मुक्ति?), ऋषि ऋण के लिए क्या (किसी को पढ़ाना? झूठी खबर रिपोर्ट करना?), और पितृ ऋण के लिए क्या (माता-पिता से मिलना? किसी वृद्धाश्रम में समय बिताना?)। फिर इसे #RtaAurTeenRin के साथ सोशल मीडिया पर साझा करें।एक-एक कर्म से ऋत स्थापित होगी। अब देर न करें, आज से शुरू करें।