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Kamandakiya Niti 9.37: Decline

क्या कोई साम्राज्य बिना युद्ध लड़े भी घुटने टेक सकता है? इतिहास गवाह है कि बड़े से बड़ा साम्राज्य भी तलवारों की धार से नहीं, बल्कि अपनी आंत...

Anand Singh Dhami 24 जुल॰, 2026

चाणक्य का रहस्य: कामन्दकीय नीतिसार

क्या कोई ऐसा शासक या मन्त्री हो सकता है जिसे राजा का अन्न न खाना पड़े और फिर भी वह राज्य का सबसे शक्तिशाली स्तम्भ बना रहे? भारतीय नीति-स...

Anand Singh Dhami 26 मई, 2026

भारतीय दर्शन और आर्थिक नैतिकता: धर्म-अर्थ संतुलन

क्या धन और नैतिकता साथ चल सकते हैं? यह सवाल सदियों पुराना है, लेकिन आज के दौर में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ गई है। जब हम चारों ओर भ्रष्टाचा...

Anand Singh Dhami 11 अप्रैल, 2026

भारतीय दर्शन और वैश्विक शांति | प्राचीन समाधान

आज के विश्व में शांति की आवश्यकता क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों साल पुराना भारतीय ज्ञान आज की सबसे बड़ी समस्या, युद्ध और अशांति का...

Anand Singh Dhami 3 अप्रैल, 2026

नेतृत्व में प्रताप का महत्व | कामंदकी नीतिसार

“सीधे पेड़ ही सबसे पहले काटे जाते हैं।” कामंदकी नीतिसार के अनुसार नेतृत्व में प्रताप का अर्थ केवल भय पैदा करना नहीं है, बल्कि ऐसा ...

Anand Singh Dhami 24 दिस॰, 2025

सही साथी: कुल या चरित्र? | नीतिसार

कामन्दकी नीतिसार में शासक और उसके साथी के गुणों का विस्तार से वर्णन मिलता है ...

Anand Singh Dhami 7 जुल॰, 2025