Kamandakiya Niti 9.37: Decline
क्या कोई साम्राज्य बिना युद्ध लड़े भी घुटने टेक सकता है? इतिहास गवाह है कि बड़े से बड़ा साम्राज्य भी तलवारों की धार से नहीं, बल्कि अपनी आंत...
क्या कोई साम्राज्य बिना युद्ध लड़े भी घुटने टेक सकता है? इतिहास गवाह है कि बड़े से बड़ा साम्राज्य भी तलवारों की धार से नहीं, बल्कि अपनी आंत...
क्या कोई ऐसा शासक या मन्त्री हो सकता है जिसे राजा का अन्न न खाना पड़े और फिर भी वह राज्य का सबसे शक्तिशाली स्तम्भ बना रहे? भारतीय नीति-स...
क्या धन और नैतिकता साथ चल सकते हैं? यह सवाल सदियों पुराना है, लेकिन आज के दौर में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ गई है। जब हम चारों ओर भ्रष्टाचा...
आज के विश्व में शांति की आवश्यकता क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों साल पुराना भारतीय ज्ञान आज की सबसे बड़ी समस्या, युद्ध और अशांति का...
“सीधे पेड़ ही सबसे पहले काटे जाते हैं।” कामंदकी नीतिसार के अनुसार नेतृत्व में प्रताप का अर्थ केवल भय पैदा करना नहीं है, बल्कि ऐसा ...
कामन्दकी नीतिसार में शासक और उसके साथी के गुणों का विस्तार से वर्णन मिलता है ...