कामन्दकीय नीतिसार: युद्ध का सही समय
जब कोई राजा युद्ध का निर्णय लेता है, तब उसके सामने केवल यह प्रश्न नहीं होता कि उसकी सेना कितनी बड़ी है। असली प्रश्न यह होता है; क्या अभी ...
जब कोई राजा युद्ध का निर्णय लेता है, तब उसके सामने केवल यह प्रश्न नहीं होता कि उसकी सेना कितनी बड़ी है। असली प्रश्न यह होता है; क्या अभी ...
क्या आपने कभी ऐसी स्थिति का सामना किया है जहाँ आपको लगा कि आपके अपने ही लोग आपसे दूर होते जा रहे हैं? या फिर कोई ऐसा संकट आया जिसमें किसी ...
क्या आपने कभी खुद को अकेला पाया है, उन लोगों के सामने जो ताकतवर भी हैं और एकजुट भी? जब कई शक्तिशाली लोग मिलकर आपके खिलाफ खड़े हो जाएँ, तो ...
दो राज्यों की सीमाओं पर तनातनी है। एक राजा का दूत अपमानित होकर लौटा है, और राजसभा में प्रतिशोध की हुंकार गूँज रही है। दूसरी ओर वह राजा है ज...
राजनीति में राजधर्म और मित्रता का रिश्ता सदा से उलझा हुआ रहा है। क्या राजा अपने मित्र के लिए सब कुछ न्योछावर कर दे? और मित्र की उपेक्षा कब...
युद्ध और शांति का प्रश्न राजनीतिक चिंतन में आरंभ से ही महत्वपूर्ण रहा है। किसी संघर्ष को कब शांत करने का प्रयास किया जाए और कब उसका प्रत्य...
नीतिशास्त्र का अध्ययन करते हुए कई बार ऐसा होता है कि कोई एक श्लोक आपको अचानक ठहरने पर मजबूर कर देता है। आप पन्ने पर आँखें गड़ाए सोचते रह जा...
“सङ्घातवान् यथा वेणुर्निबिडः कण्टकैर्वृतः । न शक्यते समुच्छेत्तुं भ्रातृसङ्घातवांस्तथा ॥” बाँसों का एक सघन झुरमुट जो चारों ओर से काँटों...