इंद्रिय सुखों का मोह और उसका विनाशकारी प्रभाव
कामंदकी नीति सार के अनुसार, जीव अपने इंद्रिय सुखों में इतना लिप्त हो जाता है कि वह अपने विनाश की ओर बढ़ने लगता है। एक हिरण जो हरी घास और जड़...
कामंदकी नीति सार के अनुसार, जीव अपने इंद्रिय सुखों में इतना लिप्त हो जाता है कि वह अपने विनाश की ओर बढ़ने लगता है। एक हिरण जो हरी घास और जड़...