धर्म

कामन्दकीय नीतिसार | राजा का धर्म और प्रजा कल्याण

क्या राजा का शरीर केवल उसके व्यक्तिगत सुख और भोग के लिए है? या फिर वह प्रजा का है? कामन्दकीय नीतिसार इस प्रश्न का उत्तर स्पष्ट शब्दों में...

Anand Singh Dhami 21 सित॰, 2025

द्वैत वेदांत: आत्मा और परमात्मा के भेद की गूढ़ व्याख्या

परिचय – जहाँ आत्मा और परमात्मा दो हैं, वहीं भक्ति का जन्म होता है "ईश्वर सर्वोपरि है, और आत्मा उसकी कृपा की प्रतीक्षा करती है।...

Anand Singh Dhami 15 सित॰, 2025

भारतीय दर्शन में धर्म का महत्व

परिचय "धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण कला है।" भारतीय दर्शन में धर्म को जीवन के मूल आधार के रूप में द...

Anand Singh Dhami 20 अग॰, 2025