Self-Control

भारतीय दर्शन से नेतृत्व कौशल सीखना: नैतिकता से प्रभाव तक

कभी सोचा है कि बिना किसी कॉर्पोरेट ट्रेनिंग या मैनेजमेंट डिग्री के, भगवान श्रीकृष्ण , चाणक्य या स्वामी विवेकानंद जैसे लोग इतने प्रभावशा...

Anand Singh Dhami 18 नव॰, 2025

अनुभवहीन सुखों का मोह क्यों फंस जाते हैं बुद्धिमान?

परिचय सुख की चाह हर व्यक्ति के जीवन का अभिन्न हिस्सा होती है। यह मानव स्वभाव का एक अनिवार्य तत्व है, फिर चाहे वह भौतिक सुख हो या मानसिक ...

Anand Singh Dhami 20 जून, 2025

मनुष्य के विनाश के छः कारण कामंदकी नीतिसार की सीख

कामंदकी नीति सार के अनुसार, राजा दंडक्य, जनमेजय, राजर्षि ऐल, असुर वातापि, राक्षस राजा पुलस्त्य (रावण) और असुर दंभोलभव इन षड्रिपुओं—वासना, क्...

Anand Singh Dhami 18 मार्च, 2025

छह विनाशकारी दोष जो राजा को छोड़ने चाहिए

कामंदकी नीतिसार के अनुसार, वासना, क्रोध, लोभ, निर्दयता, अहंकार और दर्प जैसे छह शत्रु (षड्रिपु) किसी भी व्यक्ति, विशेष रूप से एक शासक के पतन...

Anand Singh Dhami 17 मार्च, 2025

आकर्षण, इच्छा और आत्मसंयम कामंदकी नीतिसार का संदेश

कामंदकी नीति सार के अनुसार, जब सुंदर स्त्रियों का मुखमंडल चंद्रमा की शीतल किरणों जैसा प्रतीत होता है, तब बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों का हृदय भी इच...

Anand Singh Dhami 13 मार्च, 2025

स्त्री-मोह और आत्मसंयम का महत्व

कामंदकी नीति सार में कहा गया है कि एक सुशिक्षित, कोमलभाषिणी और काम-कला में निपुण स्त्री के प्रति आकर्षण स्वाभाविक है, लेकिन क्या कोई व्यक्ति...

Anand Singh Dhami 12 मार्च, 2025

कामंदकी नीति: इंद्रिय सुख और पतन

शक्तिशाली हाथी भी जब इंद्रिय सुख के मोह में फंसता है, तो अपनी स्वतंत्रता और विवेक खो बैठता है। क्या शक्ति का पतन सिर्फ दुश्मनों से होता है? ...

Anand Singh Dhami 3 मार्च, 2025

इंद्रिय सुखों का मोह और उसका विनाशकारी प्रभाव

कामंदकी नीति सार के अनुसार, जीव अपने इंद्रिय सुखों में इतना लिप्त हो जाता है कि वह अपने विनाश की ओर बढ़ने लगता है। एक हिरण जो हरी घास और जड़...

Anand Singh Dhami 2 मार्च, 2025

भोग-विलास में लिप्त राजा की विनाशकारी भूल

कामंदकी नीति सार के अनुसार, जो राजा अपनी इंद्रियों को नियंत्रित नहीं करता और भोग-विलास में लिप्त रहता है, वह न केवल पश्चाताप करता है, बल्...

Anand Singh Dhami 27 फ़र॰, 2025