भारतीय दर्शन से नेतृत्व कौशल सीखना: नैतिकता से प्रभाव तक
कभी सोचा है कि बिना किसी कॉर्पोरेट ट्रेनिंग या मैनेजमेंट डिग्री के, भगवान श्रीकृष्ण , चाणक्य या स्वामी विवेकानंद जैसे लोग इतने प्रभावशा...
कभी सोचा है कि बिना किसी कॉर्पोरेट ट्रेनिंग या मैनेजमेंट डिग्री के, भगवान श्रीकृष्ण , चाणक्य या स्वामी विवेकानंद जैसे लोग इतने प्रभावशा...
परिचय सुख की चाह हर व्यक्ति के जीवन का अभिन्न हिस्सा होती है। यह मानव स्वभाव का एक अनिवार्य तत्व है, फिर चाहे वह भौतिक सुख हो या मानसिक ...
कामंदकी नीति सार के अनुसार, राजा दंडक्य, जनमेजय, राजर्षि ऐल, असुर वातापि, राक्षस राजा पुलस्त्य (रावण) और असुर दंभोलभव इन षड्रिपुओं—वासना, क्...
कामंदकी नीतिसार के अनुसार, वासना, क्रोध, लोभ, निर्दयता, अहंकार और दर्प जैसे छह शत्रु (षड्रिपु) किसी भी व्यक्ति, विशेष रूप से एक शासक के पतन...
कामंदकी नीति सार के अनुसार, जब सुंदर स्त्रियों का मुखमंडल चंद्रमा की शीतल किरणों जैसा प्रतीत होता है, तब बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों का हृदय भी इच...
कामंदकी नीति सार में कहा गया है कि एक सुशिक्षित, कोमलभाषिणी और काम-कला में निपुण स्त्री के प्रति आकर्षण स्वाभाविक है, लेकिन क्या कोई व्यक्ति...
शक्तिशाली हाथी भी जब इंद्रिय सुख के मोह में फंसता है, तो अपनी स्वतंत्रता और विवेक खो बैठता है। क्या शक्ति का पतन सिर्फ दुश्मनों से होता है? ...
कामंदकी नीति सार के अनुसार, जीव अपने इंद्रिय सुखों में इतना लिप्त हो जाता है कि वह अपने विनाश की ओर बढ़ने लगता है। एक हिरण जो हरी घास और जड़...
कामंदकी नीति सार के अनुसार, जो राजा अपनी इंद्रियों को नियंत्रित नहीं करता और भोग-विलास में लिप्त रहता है, वह न केवल पश्चाताप करता है, बल्...