कामंदकीय नीतिसार : समान शक्ति में संधि क्यों?
राजनीति में हर युद्ध इसलिए नहीं लड़ा जाता कि कोई पक्ष निश्चित रूप से जीत सकता है। कई बार युद्ध इसलिए शुरू होता है क्योंकि दोनों पक्ष अपनी श...
राजनीति में हर युद्ध इसलिए नहीं लड़ा जाता कि कोई पक्ष निश्चित रूप से जीत सकता है। कई बार युद्ध इसलिए शुरू होता है क्योंकि दोनों पक्ष अपनी श...
राजा, राज्य और नीति-ग्रंथ की परंपरा प्राचीन भारतीय राजनीति-शास्त्र में राजा केवल शासक नहीं था, वह राज्य-तंत्र का केंद्र था। कामन्दकीय नी...
कामन्दकीय नीतिसार का नवम सर्ग राजाओं के पारस्परिक संबंधों, युद्ध और संधि जैसे विषयों से जुड़ा है। इसी क्रम में यह श्लोक आता है- ईषदायच्...
एक शक्तिशाली सिंह के सामने एक हिरण यह दृश्य केवल वन्यजीवन का आकस्मिक संयोग नहीं, बल्कि शक्ति-असंतुलन की उस कठोर वास्तविकता का प्रतीक है, जि...
कामन्दकीय नीतिसार का सप्तम सर्ग (राजपुत्ररक्षणप्रकरणम् एवं आत्मरक्षणप्रकरणम्) राजा के उत्तराधिकारियों के अनुशासन एवं संस्कार, तथा राजा की...