प्रसङ्गयान: अभियान का रुख क्यों बदले
राजनीति में कभी-कभी ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति किसी एक के लिए निकलता है और पहुँच जाता है किसी और के पास। अभियान की दिशा रास्ते में ही बदल ज...
राजनीति में कभी-कभी ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति किसी एक के लिए निकलता है और पहुँच जाता है किसी और के पास। अभियान की दिशा रास्ते में ही बदल ज...
प्राचीन भारत में राज्य केवल तलवार के बल पर नहीं चलते थे। कौटिल्य अर्थशास्त्र की परंपरा में राजा को यह तय करना होता था कि कब अकेले लड़ना है...
राजा अपनी विशाल सेना के साथ युद्ध के मैदान में आगे बढ़ रहा है। सामने शत्रु खड़ा है, और पीछे पार्ष्णिग्राह, यानी पीछे से आक्रमण करने वाला शत...
युद्ध का निर्णय केवल इस आधार पर नहीं होता कि किसके पास अधिक सेना है। उससे पहले यह देखना पड़ता है कि सामने कौन है, उसके साथ कौन खड़ा है, अपन...
प्राचीन भारतीय राजनीतिशास्त्र और कूटनीति में राजा के कर्तव्यों तथा युद्धकला का सूक्ष्म अध्ययन मिलता है। जब कोई राज्य सीमा विस्तार या शत्रु ...
प्राचीन भारतीय राजशास्त्र में राजा के लिए केवल यह जानना पर्याप्त नहीं था कि कब युद्ध करना है। उससे पहले यह समझना भी आवश्यक था कि किसी अभिया...
कामन्दकीय नीतिसार का दशम सर्ग (विग्रहविकल्पप्रकरणम्) भारतीय राजनय-परम्परा में संघर्ष, युद्ध एवं उसके शमन के सूक्ष्म वर्गीकरण, विग्रह के मन...